Wednesday, June 16, 2021

चलो खुद में कोई अना ढूंढे

चलो खुद में कोई अना ढूंढे
ना भी हो तो  बेपनाह ढूंढे

आज फिर वो हो गए खफा 
चलो खुद का कोई गुनाह ढूंढे

चलो आज ढूंढे कोई बेसहारा
फिर उसके लिए पनाह ढूंढे

तुम्हे जो वो बेइंतेहा इश्क़ था
वो मोहब्बत वाली निगाह ढूंढे

उनपे मुकदमा कर दें बेवफाई का
और फिर अपने लिए गवाह ढूंढे

उन निगाहों में अपने लिए प्यार
मिलना नहीं है, खामख्वाह ढूंढे

अपना गम गैरों को बताकर
कोई मुफ्त की सलाह ढूंढे

लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"

No comments:

Post a Comment

हद्द है

वो बिना इश्क़ सोगवार है हद्द है और इश्क़ भी नागवार है हद्द है जब पता ही था वो बेवफा है क्यों ये दिल बेकरार है हद्द है बस ख्वाब में मिलने की आस...