Monday, March 2, 2026

शुक्रिया अदा करो

खुदा की किस क़दर इनायत है शुक्रिया अदा करो 

हम और तुम उसी की बनावट है शुक्रिया अदा करो


ये जो दुख भरी जिंदगी है जिसका तुम्हें मलाल है 

ये लाखों लोगों की इबादत है शुक्रिया अदा करो


ये जो तुम्हें मेरी हर बात से नाखुश रहने की आदत है  

ये इश्क़ नहीं है ये शिकायत है शुक्रिया अदा करो


तुम्हें ये कैसा मलाल है की तुम्हें कुछ भी मिला नहीं 

जो मिला वो खुदा की बरकत है शुक्रिया अदा करो 


सेहत है घर बार है  परिवार और दोस्त मयस्सर है 

ये परवरदिगार की रहमत है शुक्रिया अदा करो

©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"


कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा

कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा  आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी  वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा  ...