Thursday, July 2, 2026

लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए

लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए 

दिलों में दर्द मेरी आँखों में समंदर आए 


कितनी मुद्दत से हैं उम्मीद में दहलीज़ मेरी

तू अपने पाँवों से इसे छूकर अंदर आए।


तू जो आए तो इसे चैन आ जाये आख़िर 

यूँ तो इस दर पर कईं पीर कलंदर आए 


आना ना आना ये तो फिर मर्जी है तेरी 

मगर आए तो फिर दिल के अंदर आए 


वो जो प्यार मांगने आया है तेरे दर पर 

उसके दर हाथ फैलाये कईं सिकंदर आए 

©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश) 

लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए

लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए  दिलों में दर्द मेरी आँखों में समंदर आए  कितनी मुद्दत से हैं उम्मीद में दहलीज़ मेरी तू अपने पाँवों से इसे ...