बस इतनी सी बात जान के जीवन सफल हो गया अपना
पिताजी माँ से कह रहे थे ये लड़का ठीक निकल गया अपना
© लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा ...