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लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए
लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए दिलों में दर्द मेरी आँखों में समंदर आए कितनी मुद्दत से हैं उम्मीद में दहलीज़ मेरी तू अपने पाँवों से इसे ...
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मैं इसलिए डरता हूँ कहीं जाने से मैं पर्दा रख पाता नहीं जमाने से खुली किताब हूँ मुझे पढ़कर लोग बाज आते नही मुझे सताने से मेरा चमन है मैंने इसे...
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निगाहें फेर लेती हो तुम कमाल करती हो जब तुम मेरे होंठों के आगे गाल करती हो । एक नजर देख लो जिसको मुड़ कर तुम बेइंतहा ग़रीब को भी मालामाल ...
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hi friends : I tried to write this gajal in the extreme boring class of Retail Management, plz have a look and if u can find some good m...
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