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कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा ...
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मैं इसलिए डरता हूँ कहीं जाने से मैं पर्दा रख पाता नहीं जमाने से खुली किताब हूँ मुझे पढ़कर लोग बाज आते नही मुझे सताने से मेरा चमन है मैंने इसे...
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hi friends : I tried to write this gajal in the extreme boring class of Retail Management, plz have a look and if u can find some good m...
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निगाहें फेर लेती हो तुम कमाल करती हो जब तुम मेरे होंठों के आगे गाल करती हो । एक नजर देख लो जिसको मुड़ कर तुम बेइंतहा ग़रीब को भी मालामाल ...
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