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कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा ...
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hi friends : I tried to write this gajal in the extreme boring class of Retail Management, plz have a look and if u can find some good m...
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मैं इसलिए डरता हूँ कहीं जाने से मैं पर्दा रख पाता नहीं जमाने से खुली किताब हूँ मुझे पढ़कर लोग बाज आते नही मुझे सताने से मेरा चमन है मैंने इसे...
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नजरिया, वक्त, हालात, दौर, कुछ नहीं बदला तेरी ज़रूरत बदल गई और कुछ नहीं बदला परिवर्तन प्रकृति का नियम है, झूठ कहते हैं वो आज भी है दिलों क...