Wednesday, July 13, 2022

नवांकुर

मेरे घर के आंगन में 
पुराने केले के पेड़ की जड़ से फूटा 
एक नया अंकुर
अब बड़ा होकर
पेड़ बनने लगा है
साथ ही वह पुराना वृक्ष
किसी बुजुर्ग पिता की भांति
अपनी जगह से हटने लगा है
नवांकुर उसे अपने स्थान से हटाते हुए
उसकी जगह ले रहा है
जैसे कोई जवान बेटा 
वयस्क होने पर कारोबार में
अपने पिता की कुर्सी संभाल ले
और बेटे की प्रगति के लिए
पिता खुद अपनी जगह छोड़ दे
क्योंकि खेल कोई भी हो
बेटे से हार जाने की खुशी
जीत की खुशी से कहीं ज्यादा सुख़ देती है,
एक पिता को।
-लोकेश ब्रह्मभट्ट 'मौन'

कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा

कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा  आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी  वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा  ...