बस इतनी सी बात जान के जीवन सफल हो गया अपना
पिताजी माँ से कह रहे थे ये लड़का ठीक निकल गया अपना
© लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए दिलों में दर्द मेरी आँखों में समंदर आए कितनी मुद्दत से हैं उम्मीद में दहलीज़ मेरी तू अपने पाँवों से इसे ...
No comments:
Post a Comment