रंग बिरंगे पंखों वाली तितलियाँ
सौंदर्य का प्रतीक हैं
इन्हें मारना बेरहमी और क्रूरता की निशानी है।
इन्हीं तितलियों का बचपन यानी लार्वा
बदसूरत और गंदा कीट ।
घिन आती है उसे देखकर भी ।
उसे मारने के लिए
कीटनाशक ईजाद किए गयें हैं ।
इन्हें मारने के आर्गेनिक तरीकों पर
रिसर्च हो रही है ।
किसी कॉकरोच को चप्पल से कुचल देना
वीरता की निशानी हैं ।
पर किसी जुगनूँ को मार देना निर्मम हत्या है ।
अमानवीय हैं ।
चिड़ियाँ, मैना, गिलहरी जैसे जीव
कितने सुंदर और मासूम हैं ।
इन्हें बचाने के लिए अभियान चलाए जा रहें हैं ।
वहीं कोवे अपने काले रंग
और छिपकलियाँ अपनी बदसूरती की
सजा भुगत रहें है ।
हम इंसानों की नैतिकता के पैमाने
रंग और सौंदर्य देख कर तय होते हैं ।
हम इंसान दोगले जानवर हैं ।
@लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
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