तू मुझको पहचान गई तो
इसमें तेरी शान गई तो
ये जो अपने बीच है अब तक
सारी दुनिया जान गई तो
चाहे सारी दौलत ले लो
मर जाऊँगा जुबान गई तो
रूठने का शोक है तुझको
इसमें मेरी जान गई तो
रूठोगी तो मनाऊँगा नहीं
डर लगता है मान गई तो
© लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा ...
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