यूँ आधा इश्क़ मैनें और आधा उसने किया,
इंतख़ाब मैंने किया इख़्तिताम उसने किया।
ये कैसे दाग नजर आ रहे है पैराहन पर मिरे
इतनी बेतरतीबी से मुझे कत्ल किसने किया
©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
मर्द का अपना कोई सपना नहीं होता वो जीता रहता है अपनों की जिंदगी और उनके सपने, बचपन से जवानी तक पूरे करता है माँ बाप के सपने, फिर पूरे क...
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