Friday, January 15, 2021

तेरे आने की उम्मीद ने सोने ना दिया

होनी को तो बहुत मंजूर था मगर होने ना दिया
उसकी दुवाओं ने मुझे मुन्तशिर होने ना दिया

बहुत ख़्वाबीदा सी लग रही है आंखें तुम्हारी
कुछ तो है जिसने तुम्हें शब भर सोने ना दिया

अजीब शक्श है और अजीब है इश्क़ उसका
हजार सितम किये मुझपे और रोने ना दिया

दुनिया के इस सहरा में भी साथ हैं हम तुम
कुछ तुमने मुझे कुछ मैंने तुम्हें खोने ना दिया

वो रात गोया एहतिज़ार के लम्हात सी गुजरी 
"मौन" तेरे आने की  उम्मीद ने सोने ना दिया

©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"

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