कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा
आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा
उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी
वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा
मुझसे दूर आख़िर तू जाएगा कहाँ
कहकशाँ तक फेला है दस्तरस मेरा
©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा
आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा
उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी
वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा
मुझसे दूर आख़िर तू जाएगा कहाँ
कहकशाँ तक फेला है दस्तरस मेरा
©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
लो शाम हुई तेरी यादों के लश्कर आए
दिलों में दर्द मेरी आँखों में समंदर आए
कितनी मुद्दत से हैं उम्मीद में दहलीज़ मेरी
तू अपने पाँवों से इसे छूकर अंदर आए।
तू जो आए तो इसे चैन आ जाये आख़िर
यूँ तो इस दर पर कईं पीर कलंदर आए
आना ना आना ये तो फिर मर्जी है तेरी
मगर आए तो फिर दिल के अंदर आए
वो जो प्यार मांगने आया है तेरे दर पर
उसके दर हाथ फैलाये कईं सिकंदर आए
©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
मर्द का अपना कोई सपना नहीं होता
वो जीता रहता है अपनों की जिंदगी
और उनके सपने,
बचपन से जवानी तक पूरे करता है
माँ बाप के सपने,
फिर पूरे करता है बीवी के अरमान
और उसकी महत्वकांक्षाओं को,
पूरी करता है बच्चों की ख्वाहिशें,
और जीता हैं उनकी ख़ुशीयाँ
भूल जाता है इतने सब में
की कुछ सपने उसके भी थे कभी,
कोई बकेट लिस्ट बनायी थी उसने भी,
कईं शौक थे उसके जो बचा कर रखे थे
की जब कमाने लगेंगे तब पूरा करेंगे,
जब कमाने लगा तो पूरा करता रहा
बीवी-बच्चों की जरूरतें,
उनके शौक उनके सपने,
और इन्ही सब में गुम हो गए उसके ख़्वाब
जो पूरे ना हो पाये कभी,
मर्द का अपना कोई सपना नहीं होता ।
©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
कहाँ कहाँ से आते हैं ये जाने वाले लोग
दिल में बसकर दिल को दुखाने वाले लोग
मिले हैं लाखों लोग जिंदगी के सफ़र में
पर वो इक्के दुक्के साथ निभाने वाले लोग
यूँ तो बहुत लोग है रूठने वाले हमसे
हमे चाहिए हम रूठें तो मनाने वाले लोग
सब दोस्तों में चराग लेकर ढूँढ रहा हूँ मैं
वो मुसीबत में मेरा फ़ोन उठाने वाले लोग
रंग बिरंगे पंखों वाली तितलियाँ
सौंदर्य का प्रतीक हैं
इन्हें मारना बेरहमी और क्रूरता की निशानी है।
इन्हीं तितलियों का बचपन यानी लार्वा
बदसूरत और गंदा कीट ।
घिन आती है उसे देखकर भी ।
उसे मारने के लिए
कीटनाशक ईजाद किए गयें हैं ।
इन्हें मारने के आर्गेनिक तरीकों पर
रिसर्च हो रही है ।
किसी कॉकरोच को चप्पल से कुचल देना
वीरता की निशानी हैं ।
पर किसी जुगनूँ को मार देना निर्मम हत्या है ।
अमानवीय हैं ।
चिड़ियाँ, मैना, गिलहरी जैसे जीव
कितने सुंदर और मासूम हैं ।
इन्हें बचाने के लिए अभियान चलाए जा रहें हैं ।
वहीं कोवे अपने काले रंग
और छिपकलियाँ अपनी बदसूरती की
सजा भुगत रहें है ।
हम इंसानों की नैतिकता के पैमाने
रंग और सौंदर्य देख कर तय होते हैं ।
हम इंसान दोगले जानवर हैं ।
©लोकेश ब्रह्मभट्ट ("मौन" लोकेश)
खुदा की किस क़दर इनायत है शुक्रिया अदा करो
हम और तुम उसी की बनावट है शुक्रिया अदा करो
ये जो दुख भरी जिंदगी है जिसका तुम्हें मलाल है
ये लाखों लोगों की इबादत है शुक्रिया अदा करो
ये जो तुम्हें मेरी हर बात से नाखुश रहने की आदत है
ये इश्क़ नहीं है ये शिकायत है शुक्रिया अदा करो
तुम्हें ये कैसा मलाल है की तुम्हें कुछ भी मिला नहीं
जो मिला वो खुदा की बरकत है शुक्रिया अदा करो
सेहत है घर बार है परिवार और दोस्त मयस्सर है
ये परवरदिगार की रहमत है शुक्रिया अदा करो
©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
तुझसे जुदाई, तेरी याद और दिसम्बर
एक तो इतने बुरे हालात और दिसम्बर
याद बहुत आते है वो साथ बिताए पल
तेरे इश्क़ में डूबी रात और दिसम्बर
ये इश्क़ मुकम्मल होना ही था उस रात
वो आख़िरी मुलाक़ात और दिसम्बर
सर्द हवायें, ठंडा कमरा, और हम तुम
मेरे हाथों में तेरा हाथ और दिसम्बर
ज़बसे हम बिछड़े हैं सब सूना सूना है
सूना घर सूने दिन रात और दिसम्बर
© लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
कुछ तो दुश्मनी में भी लिहाज रख मेरा आख़िर तू दोस्त रहा है कईं बरस मेरा उसके लिबास से ख़ुशबू मेरी ही आएगी वो बरसों तलक रहा है मोहतरम मेरा ...