एक खबर की ख़ुशबू है फ़िज़ाओं में,
ये शहर फिर शहर सा लगने लगा है |
लगता है कोई राज़ है उसके सीने में,
वो कुछ और शगुफ्ता रहने लगा है |
वो दुनिया में न आया पर अभी से,
वो दिलो-दिमाग में रहने लगा है |
उसने ये खबर सुनाई है जब से मुझे,
इन कंधो पे वजन कुछ बढ़ने लगा है |
ये शहर फिर शहर सा लगने लगा है |
लगता है कोई राज़ है उसके सीने में,
वो कुछ और शगुफ्ता रहने लगा है |
वो दुनिया में न आया पर अभी से,
वो दिलो-दिमाग में रहने लगा है |
उसने ये खबर सुनाई है जब से मुझे,
इन कंधो पे वजन कुछ बढ़ने लगा है |
©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"
25/06/2017
No comments:
Post a Comment