Friday, May 15, 2020

तुम्हारा गुस्सा

ये जो तुम जरा सी बात पर बेवजह, 
बेहिसाब गुस्सा कर लेती हो,
ये हुनर तुम्हें बचपन से आता था?
या मेरा डर से पीला पड़ा चेहरा देखने की ख्वाहिश में
कहीं से तालीम ली है तुमने?
जो भी हो, तुम्हें शायद नहीं मालूम, 
की मैं तो डर जाता हूँ तुमसे,
पर घर की हर एक चीज हंस देती है तुमपे,
तुम्हें इतनी खूबसूरती से गुस्सा करते देख कर।

© लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"

1 comment:

  1. वाह बहुत सुंदर अनुभूति और शानदर अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete

कैसे चला जाऊं इस आशियाने से

मैं इसलिए डरता हूँ कहीं जाने से मैं पर्दा रख पाता नहीं जमाने से खुली किताब हूँ मुझे पढ़कर लोग बाज आते नही मुझे सताने से मेरा चमन है मैंने इसे...