Sunday, October 30, 2022

तुम्हें याद दिलाना है।

कहीं मिलो किसी दिन
तुम्हें याद दिलाना है

वो वादा जो तुमने खुद किया था,
और मैनें कहा था नहीं निभा पाओगी तुम।
वो दावा जो तुमनें खुद किया था,
की जिंदगी भर दोस्त बनकर रहोगी तुम।
वो वादा तुम्हें याद दिलाना है।

कहीं मिलो किसी दिन
तुम्हें याद दिलाना है

वो गर्मियों की दोपहरी का दिन 
जब तुम्हारी किताबें तुम्हें देने को 
घण्टों तुम्हारी बताई जगह पर खड़ा रहा मैं।
और तुम ना आई,
इसलिए कि तुम्हारा काजल खो गया था,
और बिना काजल लगाए 
तुम मेरे सामने कैसे आती।
वो काजल मेरे ही पास है 
तुम्हें वापस लौटाना है। 

कहीं मिलो किसी दिन
तुम्हें याद दिलाना है

वो जब तुम गुस्से में मुंह फुला कर 
खामोश बेठ जाती थी,
पर तुम्हारी आंखें और होंठ 
बराबर लड़ते रहते थे मुझसे।
जब तुम उदास होती तो 
तुम्हारी सहेलियाँ फोन करती मुझे,
की संभालो इसको, 
आप ही के बस की बात है ये।
एक आख़िरी बार तुम्हें गुस्सा दिला कर 
फिर मनाना है 

कहीं मिलो किसी दिन
तुम्हें याद दिलाना है

आज जब तुम किसी और के साथ 
बहुत खुश हो,
और बरसों तुम्हें मेरी याद नहीं आती,
जो कि अच्छा ही है।
पर हर जन्मदिन पर 
पहला फोन तुम्हारा आएगा जिंदगी भर,
ये वादा था तुम्हारा, 
और मेरा भी, 
मुझे तो याद है।
तुम्हें फिर याद दिलाना है।

कहीं मिलो किसी दिन
तुम्हें याद दिलाना है
©लोकेश ब्रह्मभट्ट "मौन"

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